पद्मश्री मोहम्मद शरीफ की कहानी,’लावारिस लाशों के मसीहा’ जो अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं कर पाए

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उम्र भर कमाया पैसा खत्म हो सकता है लेकिन जो दुआएँ
समाज सेवा करने से मिलती हैं वो कभी खत्म नही हो सकती है।

आज हम आपको समाज के एक ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताएंगे भी हैं जो अपने जीवन में अब तक 25 हजार से भी अधिक लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं वो भी निस्वार्थ भाव से। उत्तर प्रदेश के रहने वाले इस इंसान का नाम मोहम्मद शरीफ़ उर्फ मोहम्मद शरीफ़ चाचा हैं। जिन्होंने अपने बेटे को खोने के बाद अपना संपूर्ण जीवन उन लोगों के नाम कर दिया जिनका अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं होता। आइये जानते हैं उनके बारे में।

बेटे के खोने के बाद समाजसेवा

उत्तर प्रदेश अयोध्या के रहने वाले मोहम्मद शरीफ़ का समाजसेवा करने का कार्य तब शुरू हुआ जब उन्होंने कई साल पहले अपने ही बेटे को खो दिया था। 28 साल पहले उनका बेटा रईस खां केमिस्ट के तौर पर सुल्तानपुर किसी काम के सिलसिले में गया था। वहीं से वह एक महीने तक गायब रहा। उसी दौरान राम जन्मभूमि का विवाद चल रहा था। पता चला कि उसी दौरान उसे मार कर रेलवे लाइन के किनारे फेंक दिया। जिसके बाद में एक बोरे में लावारिस लाश की तरह उसकी बॉडी मिली। जिसे कई जंगली जानवरों ने खा लिया था। अपने बेटे के शव की इस दुर्दशा को देख उन्होंने फैसला किया कि लावारिस मृतकों का एक सभ्य संस्कार कराएंगे।

लोगों ने पागल बुलाया

वह शवों को अंतिम संस्कार के लिए पास के श्मशान या दफन भूमि पर ले जा रहें हैं। उन्हे यह करते हुए देखने वाले लोग उन्हे पागल कह कर बुलाते थे, लेकिन उन्होने अपना काम जारी रखा और लोगों की बातों की परवाह नहीं की। मोहम्मद शरीफ़ चाचा के नाम से प्रसिद्ध पिछले 27 वर्षों से अयोध्या में मृतकों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। मोहम्मद जी ने उत्तर प्रदेश में अब तक 25,000 से अधिक लावारिस शवों का अंतिम संस्कार किया है।

पेशे से साइकिल मैकेनिक

वह एक साइकिल मैकेनिक है और जाति, पंथ या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं। जब मृतकों को सम्मानित करने की बात आती है, वह मृतकों के धर्म के अनुसार अंतिम संस्कार की व्यवस्था करते हैं। मोहम्मद शरीफ़ चाचा लावारिस जी शवों की तलाश के लिए नियमित रूप से आसपास के अस्पतालों, पुलिस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और मठों का दौरा करते हैं। यदि 72 घंटों के भीतर शव का दावा नहीं किया जाता है, तो सरकारी अधिकारी शव को अंतिम संस्कार के लिए मोहम्मद को सौंप देते हैं।

सरकार ने किया सम्मानित

अपने को खोकर अपना पूरा जीवन दूसरों को समर्पित करने वाले मोहम्मद शरीफ को कई सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। मोहम्मद शरीफ़ चाचा के कार्य के आगे हर सम्मान कम है। उनके इस भावपूर्ण समाजसेवा के कार्य को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान में से एक पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया है। वह आज लोगों के लिए प्रेरणा हैं। उनके इस समाजसेवा के लिए उनकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है।

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